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दोष देते हैं सभी सरकार जिम्मेदार हैं - राम भदावर

 दोष देते हैं सभी सरकार जिम्मेदार हैं देश के इस हाल पर नेताओं को धिक्कार हैं ये चयन हैं आपका तो फिर कहो धिक्कार कैसा, और बुरा कहने का हैं भला अधिकार कैसा पिछले चुनावों में तुम ही तो नोट लेते दिख गए, और कुछ गद्दार थे जो बोतलों में ही बिक गए हैं नियम संसार का जिसने किया वहीं भरेगा, चोर पालोगे तो क्या चोरी पड़ोसी की करेगा? ओर रैलियों में झुमकर जयकार करता कौन हैं थाम कर झंडा मचल कर प्यार करता कौन हैं, और जाति वाले जाति वालों को जिताने के लिए, उमड़ते हैं साथ में फ़ोटो खिंचाने के लिए , कुछ के तो उनके जाति वाले उनके जाति से निकले ही नहीं , और कुछ सरकार चुनने बिलों से निकले नहीं..! ~ राम भदावर

वीदा , अशोक वाजपेयी

                    वीदा                     अशोक वाजपेयी  तुम चले जाओगे पर थोड़ा-सा यहाँ भी रह जाओगे जैसे रह जाती है पहली बारिश के बाद हवा में धरती की सोंधी-सी गंध भोर के उजास में थोड़ा-सा चंद्रमा खंडहर हो रहे मंदिर में अनसुनी प्राचीन नूपुरों की झंकार| तुम चले जाओगे पर थोड़ी-सी हँसी आँखों की थोड़ी-सी चमक हाथ की बनी थोड़ी-सी कॉफी यहीं रह जाएँगे प्रेम के इस सुनसान में| तुम चले जाओगे पर मेरे पास रह जाएगी प्रार्थना की तरह पवित्र और अदम्य तुम्हारी उपस्थिति, छंद की तरह गूँजता तुम्हारे पास होने का अहसास| तुम चले जाओगे और थोड़ा-सा यहीं रह जाओगे|

सरफ़रोशी की तमन्ना

          सरफ़रोशी की तमन्ना   सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-क़ातिल में है एक से करता नहीं क्यूँ दूसरा कुछ बातचीत, देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफ़िल में है ऐ शहीद-ए-मुल्क-ओ-मिल्लत मैं तेरे ऊपर निसार, अब तेरी हिम्मत का चरचा ग़ैर की महफ़िल में है वक़्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आसमान, हम अभी से क्या बतायें क्या हमारे दिल में है खैंच कर लायी है सब को क़त्ल होने की उम्मीद, आशिकों का आज जमघट कूच-ए-क़ातिल में है